साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार से सम्मानित लेखक भगवंत अनमोल उन चुनिन्दा लेखकों में से हैं, जिन्हें हर वर्ग के पाठको ने हाथो-हाथ लिया है. एक ओर जहाँ उन्हें आम पाठको ने खूब सराहा, वहीँ दूसरी ओर अकादमिक और साहित्यिक जगत का भी खूब प्यार मिला. नयी पीढ़ी के लेखकों में भगवंत अग्रिम पंक्ति पर नज़र आते हैं. उनकी किताब 'ज़िन्दगी 50-50' ने हिंदी साहित्य में नए कीर्तिमान स्थापित किये हैं. किन्नर जीवन पर आधारित आपका उपन्यास 'ज़िन्दगी 50-50' एक ओर जहाँ दैनिक जागरण नील्सन बेस्ट सेलर लिस्ट में कई बार शामिल रहा, वहीँ उसे उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा 'बालकृष्ण शर्मा नवीन पुरस्कार' से भी अलंकृत किया गया. इस उपन्यास को कर्नाटक विश्वविद्यालय के परास्नातक के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है और इस किताब पर देश भर के हज़ारो शोधार्थी शोध कर रहे हैं.
आपका अगला उपन्यास 'बाली उमर' एक ताज़ा हवा के झोंके जैसा है, इसमें बाल मन में उठ रहे वयस्क सवालो का रोचक अंदाज़ में चित्रण किया गया है.
हाल ही में आपका नया उपन्यास 'प्रमेय' हिंदी साहित्य में नया ट्रेड शुरू करने वाला उपन्यास है. यह साइंस फिक्शन, धर्म और अध्यात्म को एक ही धागे में पिरोता है. असल में यह विज्ञान और धर्म के बीच सत्ता संघर्ष दर्शाता है. इस उपन्यास के लिए आपको 'साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार 2022' से सम्मानित किया जा रहा है.




