Railampel [Rush]
ज़िंदगी, ज़िंदगी भर नहीं है दोस्त!ज़िंदगी कभी वेटिंग...
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ज़िंदगी, ज़िंदगी भर नहीं है दोस्त!
ज़िंदगी कभी वेटिंग टिकट है, कभी तय रिजर्वेशन के बावजूद बग़ल वाले पसेंजर से सीट की अदला-बदली है।
कभी सीट के नीचे से झोले की चोरी है तो कभी शौचालय की जंज़ीर से बंधी मग है।
कभी रात के सफ़र में कर्तव्यनिष्ठ पैसेंजरों की शिकायत से झँटुआया हुआ टीटीई है, तो कभी गरम चाय, ख़राब चाय, ठंडी चाय है। कभी लेमन टी तो कभी मिट्टी के बुरादे जैसी छिड़की हुई कॉफ़ी है ज़िंदगी। ज़िंदगी कभी माज़ा मैंगो ठंडा पानी बोतल है। कभी पैंट्री कार के पनीर में निकला तिलचट्टा है, तो कभी दस रुपये की तीख़ी झालमुढ़ी तो कभी पाँच रुपए का ठंडा समोसा है।
कभी जनरल डब्बे में सरकार बनाते-गिराते खैनी खाकर चीखते चाणक्यों की भिडंत है ज़िंदगी।
ज़िंदगी रेलमपेल है महराज!
Please This audiobook is in Hindi.
- Format:
- Pages:8 pages
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- kindle Asin:B0DNFYBNQK
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